कलियुग जब खड़ा हो गया परब्रह्म के सामने - आशुतोष राणा
(आज कलियुग परब्रह्म के सामने खड़ा है और परब्रह्म को अपनी बेहिसाब ताकत से अवगत करा रहा है। वह उन्हें बता रहा है कि कैसे वह कंस, रावण और दुर्योधन जैसे योद्धाओं से ज्यादा चालाक और ताकतवर है।) अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूँ अब कुबुद्धी को लिए मैं बुद्ध होना चाहता हूँ चाहता हूँ इस जगत में शांति चारों ओर हो इस जगत के प्रेम पर मैं क्रुद्ध होना चाहता हूँ चाहता हूँ तोड़ देना सत्य की सारी दीवारें चाहता हूँ मोड़ देना शांति की सारी गुहारें चाहता हूँ इस धरा पर द्वेष फूले और फले चाहता हूँ इस जगत के हर हृदय में छल पले मैं नहीं रावण की तुम आओ और मुझको मार दो मैं नहीं वह कंस जिसकी बाँह तुम उखाड़ दो मैं जगत का हूँ अधिष्ठाता मुझे पहचान लो हर हृदय में मैं बसा हूँ बात तुम ये जान लो अब तुम्हारे भक्त भी मेरी पकड़ में आ गए हैं अब तुम्हारे संतजन बेहद अकड़ में आ गए हैं मारना है मुझको तो, पहले इन्हें तुम मार दो युद्ध करना चाहो तो, पहले इन्हीं से रार लो ये तुम्हारे भक्त ही अब धुर विरोधी हो गए हैं ये तुम्हारे संतजन अब विकट क्रोधी हो गए है मैं नहीं बस का तुम्हारे राम, कृष्ण और बुद्ध का मैं बनूँ...
👌👌
ReplyDeleteThank you Gulshan!
Delete👌
ReplyDeleteThanks Mithlesh!
DeleteNice🌙🌙🪐🪐
ReplyDeleteThanks! Seeing the Moon and the Saturn together in sky is a great experience. Try to track them when they are above horizon.
DeleteSimple yet effective. Really thoughtful ...keep it up yaayaawar
ReplyDeleteMeans a lot! Thank you so much Nafis!
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